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शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

तुम्हारे लिए ----

तुम हो साथ मेरे-
पल - पल,
हर  छन.
हर अच्छे एहसास  में
हर अवसाद भरे पल में भी .
ज़िन्दगी में वो सुख के पल पाए हैं
जब तुम थे साथ मेरे--
केवल तुम....
ज़िन्दगी का हर वो लम्हा
जहाँ  कहीं  मैं अकेली  थी-
उदासी  भरे  पलों में
उस समय में भी थे
तुम साथ-साथ ही-
लेकिन थोड़ी  दूरी पर
चलते हुए
पर थे  साथ-साथ.......


१जनवरी, 2०१०

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
    आप बहुत अच्छा लिखती हैं और गहरा भी.
    बधाई.

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  2. कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

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